13 June 2009

कोई गीत नया मै गाऊँ.....



कोई गीत नया मैं गाऊँ ,
सुर में खोता जाऊं ,
कोई गीत नया मैं गाऊँ …..

मन की अमराई में छुप कर
भीगी सारी रागिनियाँ
ढूंढूं उनको , खो जाऊं ,
सुर में खोता जाऊं ,
कोई गीत नया मैं गाऊँ ……

प्रेम की परिभाषा है धूमिल ,
सोये व्याकुल नैनों में सपने
जागूँ , फ़िर सो जाऊं ,
सुर में खोता जाऊं ,
कोई गीत नया मैं गाऊँ …..

ढलता है दिन धीमे धीमे
शाम सिमटती अलसाई
बोलूँ कुछ , चुप हो जाऊं
सुर में खोता जाऊं ,
कोई गीत नया मैं गाऊँ …..

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